Sunday, April 13, 2014
Tuesday, March 18, 2014
Monday, March 10, 2014
Sunday, March 9, 2014
Friday, March 7, 2014
भटके मन बन स्मृतियात्री
स्मृतियों का बन है घना
मन स्मृतियों में है खोया।
शब्दों के ताने-बाने में
अनुभव के मोती पिरो रहा।
दिन बीता, विस्तारी रात्री…
भटके मन बन स्मृतियात्री।
कुछ खट्टे से, कुछ खारे से,
कुछ कड़वे, मीठे, कुछ सारे से।
बीते दिन निशि में टिमके हैं
सुदूर गगन के तारे से।
दीपक की ज्यों जले बाती,
भटके मन बन स्मृतियात्री।
©आशुतोष ओ. साहू
मन स्मृतियों में है खोया।
शब्दों के ताने-बाने में
अनुभव के मोती पिरो रहा।
दिन बीता, विस्तारी रात्री…
भटके मन बन स्मृतियात्री।
कुछ खट्टे से, कुछ खारे से,
कुछ कड़वे, मीठे, कुछ सारे से।
बीते दिन निशि में टिमके हैं
सुदूर गगन के तारे से।
दीपक की ज्यों जले बाती,
भटके मन बन स्मृतियात्री।
©आशुतोष ओ. साहू
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